जिला स्तरीय चिकित्सा अधिकारियों हेतु प्रबंधन, जन स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यावसायिक विकास पाठ्यक्रम

देश में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यक्रमों (राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन) के प्रभावशाली क्रियान्वयन हेतु क्षमता निर्माण की दिशा में एक प्रयास ।

भारतीय गणतंत्र ने वर्ष 1996-97 में उक्त सम्मूलेन के एक भागीदार के रूप में स्वास्थ्य एवं परिवार के क्षेत्र में सुधारों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की। वर्ष 1994 काइरो में आई.सी.पी.डी. से उत्पन्न व्यापक प्रस्ताव का अनुसरण करते हुए, परिवार कल्याण विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने यूरोपियन आयोग के सहयोग से 1997 में शुरू करने के लिए भारत के कुछ चयनित क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण क्षेत्रों से जुड़े निवेश कार्यक्रमों को शुरू किया। उपयुक्त जिला कार्रवाई को प्रतिपादित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में अवस्थिति विश्लेषण को प्रमुखता से महत्त्व प्रदान किया गया था। कार्य गतिविधियां सुचारू रूप से आगे बढ़ने पर यह पाया गया कि जहां तक सरकारी क्षेत्रों का संबंध था, संक्रियात्मक रूप से जिला स्तर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारियों द्वारा उप-मुख्य चिकित्सा अधिकारियों एवं संबंधित कार्यक्रम अधिकारियों के सहयोग से स्वास्थ्य देखभाल सेवा वितरण के संबंध में नोडल स्तर का लाभ उठाया गया। सेवा प्रारम्भ होने के कुछ ही वर्षों के भीतर, परिप्रेक्ष्य पदाधिकारी उच्चतर पद प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन इसकी अपेक्षा वांछित दक्षता की कमी के कारण, स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं जैसे सामान्य प्रबंधन, महत्वपूर्ण मानवीय कुशलता की कमी, मानव संसाधन प्रबंध एवं वित्तीय प्रबंधन, उपादान प्रबंध, अनुशासनिक/सतर्कता मामले और इससे भी अधिक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य एवं संचार से जुडी सतत परियोजनाओं का प्रबंधन जिनका मेडिकल कॉलेजों में अध्ययन नहीं कराया जाता है, प्रशासकीय अनिर्णयन के समक्ष स्वयं को अक्षम पाते हैं। कुछ तकनीकों जैसे पी.एल.ओ., एफ.जी.डी. के माध्यम से समुदायों में आवश्यक बुनियादी ज़रूरतों की वस्तुगत/सामान्य, परिमाण/अनुमान तथा समस्याओं के लिए कम्प्यूटर समर्थित समाधानों के अतिरिक्त अन्य कौशल की आवश्यकता होती है, ताकि कुल मिलाकर स्वास्थ्य क्षेत्र में किये गए निवेश सहित परिमाण मिल सकें। इस तथ्य को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2002, के अंतर्गत प्रदर्शित किया गया है।


इस प्रकार विशेष राज्यों के परामर्श से भारत सरकार द्वारा पूरे देश में जिला स्तरीय अधिकारियों की चरणबद्ध ढ़ंग से और क्षमता निर्माण की सुधार प्रक्रिया को क्रियान्वित करना शुरू किया गया, जो इसी का एक हिस्सा था। और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद् के आठवें सम्मेलन, नई दिल्ली (28 मई से 29 अगस्त 2003) में इसे ऐतिहासिक राष्ट्रीय टिप्पणी के रूप में इस विचार को और अधिक बल प्रदान किया गया, जहाँ इसे निर्विरोध सहमति प्रदान कर दी गई कि “जन स्वास्थ्य, प्रबंधन एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के सुधार में 12-16 वर्ष की सेवा कोष्ठक वाले चिकित्सा अधिकारियों की व्यावसायिक प्रशिक्षण” को उनके दायित्वों को बेहतर तरीके से संभालने हेतु मुख्य चिकित्सा अधिकारी/सिविल सर्जन/अस्पताल अधीक्षक के प्रोन्नयन हेतु पूर्व प्रयोजनीय बनाया जाना चाहिए।


इस क्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान को ‘पाठ्यक्रम संचालन संस्थान’ के रूप में अभिज्ञात किया गया और वर्ष 2001 में पहला पाठ्यक्रम संचालन किया गया। प्रायोगिक अवस्था के दौरान यूरोपियन तकनीकी सहायता आयोग के कार्यालय द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में प्रथम तीन प्रायोगिक पाठ्यक्रम के परिणामों को जांचने-परखने हेतु टाटा समाज विज्ञान संस्थान, मुंबई से विशषज्ञों को शामिल किया गया। विशेषज्ञों की टिप्पणियों ने, जिन्होंने मूल्यांकन प्रक्रिया का संचालन किया और परिवार कल्याण विभाग, भारत सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत की है, पाठ्यक्रम की उपयोगिता का समर्थन किया है।


प्रशिक्षण कार्य के पश्चात, अनेक जिला चिकित्सा अधिकारियों पर अत्यधिक दायित्व होते हैं, साथ ही प्रशिक्षण कार्य शुरू किया गया तथा वर्ष 2005 से ही पूरे देश के अन्य संस्थानों द्वारा संचालित भी किया गया. आगामी वर्षों में वरिष्ठ जिला स्तरीय चिकित्सा अधिकारियों को 12-16 वर्ष की अवधि की सेवा के पश्चात, उच्च-स्तरीय प्रशासकीय पदों हेतु प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है। यह पाठ्यक्रम समयबद्ध ढ़ंग से प्रत्येक राज्य में राज्य सरकार के अधीन कार्यरत 12 से 16 वर्ष की सेवा का अनुभव रखने वाले माध्यमिक स्तर के चिकित्सा अधिकारियों के लिए ‘एक नियमित पुनश्चर्या प्रशिक्षण पाठ्यक्रम’ के रूप में उल्लिखित किया गया है।



लक्ष्य के संबंध में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के प्रमुख घटक हैं- विकेंद्रीकरण, हस्तांतरण, प्रदर्शन से जुड़ी वित्तीय सहायता, इन्फ्रास्ट्रक्चर/ श्रमिकबल, सामुदायिक भागीदारी, उपयोगकर्ता के अनुकूल देखभाल और सार्वजनिक-निजी भागीदारी। इन सभी को पूरा करने हेतु स्वास्थ्य देखभाल कार्मिकों को सम्पूर्ण देश में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सुधार कार्यक्रमों के अंतर्गत जारी एक आधारभूत हिस्से के रूप में प्रस्तावित वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता/अभिगम/वहनीयता को सुनिश्चित करने के लिए “परिवर्तन के अभिकरण” के रूप में कार्य करना होगा।


चिकित्सा अधिकारियों की क्षमता निर्माण में वृद्धि/अर्जित करने के लिए, प्रशिक्षित कार्मिकों का गुणावगुण जन समूह जिले में उपलब्ध हो, राज्यों में और अधिक संस्थान इसे व्यावसायिक विकास पाठ्यक्रम को एक व्यापक क्षमता निर्माण कार्याभ्यास बनाने के लिए चिन्हित किये जाने की प्रक्रिया में हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन को सभी गतिविधियों के लिए जिस तरह से एक नोड के रूप में ब्लॉक के साथ कार्यान्वित किया जा रहा है, वैसे-वैसे ब्लॉक स्तरीय चिकित्सा अधिकारियों को राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन को प्रभावशाली रूप में कार्यान्वित करने के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा।


नीति नियामकों हेतु प्रशिक्षण आवश्यकता (टी.एन.ए.) प्रारूप

डॉक्टरों के लिए जो व्यावसायिक विकास पाठ्यक्रम में शामिल हुए हैं, टी.एन.ए. प्रारूप

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11 जुलाई व्यावसायिक विकास पाठ्यक्रम 2009 का परिचयात्मक दस्तावेज़ देखने हेतु यहां क्लिक करें

राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में आयोजित 11वें व्यावसायिक विकास पाठ्यक्रम की अनंतिम रिपोर्ट देखने हेतु यहाँ क्लिक करें

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राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में आयोजित 14वें व्यावसायिक विकास पाठ्यक्रम (21 मार्च, 2011 से 28 मई, 2011) की अनंतिम रिपोर्ट देखने हेतु यहाँ क्लिक करें

राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में आयोजित 14वें व्यावसायिक विकास पाठ्यक्रम की अनंतिम रिपोर्ट देखने हेतु यहाँ क्लिक करें

राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में आयोजित 15वें व्यावसायिक विकास पाठ्यक्रम (14 नवम्बर, 2011 से 21 जनवरी, 2012) की परिचयात्मक प्रलेख हेतु यहाँ क्लिक करें

राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में आयोजित 16वें व्यावसायिक विकास पाठ्यक्रम (26 मार्च, 2012 से 2 जून, 2012) परिचयात्मक प्रलेख हेतु यहाँ क्लिक करें

राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में आयोजित 17वें व्यावसायिक विकास पाठ्यक्रम (26 नवम्बर, 2012 से 2 फरवरी, 2013) की परिचयात्मक प्रलेख हेतु यहाँ क्लिक करें

देश में पी.डी.सी. प्रशिक्षित प्रतिभागियों की सूची देखने हेतु यहाँ क्लिक करें( 7 अक्टूबर, 2013)